vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 44: अर्जुनको अस्त्र और संगीतकी शिक्षा
»
श्लोक 7
श्लोक
3.44.7
वादित्रं देवविहितं नृलोके यन्न विद्यते।
तदर्जयस्व कौन्तेय श्रेयो वै ते भविष्यति॥ ७॥
अनुवाद
'कुन्तीनन्दन! देवताओं के उस वाद्य का ज्ञान प्राप्त करो, जो अभी तक मनुष्य लोक में प्रचलित नहीं है। यही तुम्हारे लिए कल्याणकारी होगा।'॥7॥
'Kuntinandan! Acquire knowledge of the musical instrument of the gods which is not yet popular in the world of humans. This will be good for you.'॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×