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mahabharat 3.44.7: 'कुन्तीनन्दन! देवताओं के उस वाद्य का ज्ञान प्राप्त करो, जो अभी तक मनुष्य लोक में प्रचलित नहीं है। यही तुम्हारे लिए कल्याणकारी होगा।'॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.44: अर्जुनको अस्त्र और संगीतकी शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 44: अर्जुनको अस्त्र और संगीतकी शिक्षा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.44.7 
वादित्रं देवविहितं नृलोके यन्न विद्यते।
तदर्जयस्व कौन्तेय श्रेयो वै ते भविष्यति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'कुन्तीनन्दन! देवताओं के उस वाद्य का ज्ञान प्राप्त करो, जो अभी तक मनुष्य लोक में प्रचलित नहीं है। यही तुम्हारे लिए कल्याणकारी होगा।'॥7॥
 
'Kuntinandan! Acquire knowledge of the musical instrument of the gods which is not yet popular in the world of humans. This will be good for you.'॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)