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mahabharat 3.44.6: तदनन्तर, जब उपयुक्त अवसर आया, तब इन्द्र ने अस्त्रविद्या में निपुण कुन्तीकुमार से कहा, 'कुन्तीनन्दन! तुम्हें चित्रसेन से नृत्य और गान सीखना चाहिए ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.44: अर्जुनको अस्त्र और संगीतकी शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 44: अर्जुनको अस्त्र और संगीतकी शिक्षा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.44.6 
तत: शक्रोऽब्रवीत् पार्थं कृतास्त्रं काल आगते।
नृत्यं गीतं च कौन्तेय चित्रसेनादवाप्नुहि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर, जब उपयुक्त अवसर आया, तब इन्द्र ने अस्त्रविद्या में निपुण कुन्तीकुमार से कहा, 'कुन्तीनन्दन! तुम्हें चित्रसेन से नृत्य और गान सीखना चाहिए ॥6॥
 
Thereafter, when the opportune moment came, Indra said to Kuntikumar, who was adept in the study of weapons, 'Kuntinandan! You should learn dance and song from Chitrasen. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)