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mahabharat 3.44.11: शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले वीर अर्जुन ने नृत्य-संबंधी अनेक कलाएँ सीखीं। वाद्य-यंत्र और गान-संबंधी सभी विद्याएँ सीखीं। तथापि, अपने भाइयों और माता कुन्तिका का स्मरण करके उन्हें कभी शांति नहीं मिली। 11॥   |   mahabharat अध्याय 3.44: अर्जुनको अस्त्र और संगीतकी शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 44: अर्जुनको अस्त्र और संगीतकी शिक्षा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.44.11 
स शिक्षितो नृत्यगुणाननेकान्
वादित्रगीतार्थगुणांश्च सर्वान्।
न शर्म लेभे परवीरहन्ता
भ्रातॄन् स्मरन् मातरं चैव कुन्तीम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले वीर अर्जुन ने नृत्य-संबंधी अनेक कलाएँ सीखीं। वाद्य-यंत्र और गान-संबंधी सभी विद्याएँ सीखीं। तथापि, अपने भाइयों और माता कुन्तिका का स्मरण करके उन्हें कभी शांति नहीं मिली। 11॥
 
The brave Arjuna, who killed the enemy warriors, learned many dance-related skills. Learned all the skills related to musical instruments and songs. However, he never felt at peace remembering his brothers and mother Kuntika. 11॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि इन्द्रलोकाभिगमनपर्वणि चतुश्चत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत इन्द्रलोकाभिगमनपर्वमें अर्जुनकी अस्त्रादिशिक्षासे सम्बन्ध रखनेवाला चौवालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)