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mahabharat 3.43.29-32: घृताची, मेनका, रम्भा, पूर्वचित्ति, स्वयंप्रभा, उर्वशी, मिश्रकेशी, दण्डगौरी, वरूथिनी, गोपाली, सहजन्या, कुम्भयोनि, प्रजागरा, चित्रसेना, चित्रलेखा, सहा और मधुरस्वरा - ये तथा अन्य सहस्त्रों अप्सराएँ इन्द्रसभा में भिन्न-भिन्न स्थानों पर नृत्य करने लगीं। वे कमलप्रिय अप्सराएँ सिद्ध पुरुषों के भी मन को प्रसन्न करने में तत्पर थीं। उनकी कमर और नितम्ब विशाल थे। नृत्य करते समय उनके सुन्दर स्तन हिल रहे थे। उनके व्यंग्य, भाव और माधुर्य आदि मन, बुद्धि और मन की समस्त वृत्तियों को वश में कर लेते थे। 29-32॥   |   mahabharat अध्याय 3.43: अर्जुनद्वारा देवराज इन्द्रका दर्शन तथा इन्द्रसभामें उनका स्वागत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 43: अर्जुनद्वारा देवराज इन्द्रका दर्शन तथा इन्द्रसभामें उनका स्वागत  »  श्लोक 29-32
 
 
श्लोक  3.43.29-32 
घृताची मेनका रम्भा पूर्वचित्ति: स्वयंप्रभा।
उर्वशी मिश्रकेशी च दण्डगौरी वरूथिनी॥ २९॥
गोपाली सहजन्या च कुम्भयोनि: प्रजागरा।
चित्रसेना चित्रलेखा सहा च मधुरस्वरा॥ ३०॥
एताश्चान्याश्च ननृतुस्तत्र तत्र सहस्रश:।
चित्तप्रसादने युक्ता: सिद्धानां पद्मलोचना:॥ ३१॥
महाकटितटश्रोण्य: कम्पमानै: पयोधरै:।
कटाक्षहावमाधुर्यैश्चेतोबुद्धिमनोहरै:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
घृताची, मेनका, रम्भा, पूर्वचित्ति, स्वयंप्रभा, उर्वशी, मिश्रकेशी, दण्डगौरी, वरूथिनी, गोपाली, सहजन्या, कुम्भयोनि, प्रजागरा, चित्रसेना, चित्रलेखा, सहा और मधुरस्वरा - ये तथा अन्य सहस्त्रों अप्सराएँ इन्द्रसभा में भिन्न-भिन्न स्थानों पर नृत्य करने लगीं। वे कमलप्रिय अप्सराएँ सिद्ध पुरुषों के भी मन को प्रसन्न करने में तत्पर थीं। उनकी कमर और नितम्ब विशाल थे। नृत्य करते समय उनके सुन्दर स्तन हिल रहे थे। उनके व्यंग्य, भाव और माधुर्य आदि मन, बुद्धि और मन की समस्त वृत्तियों को वश में कर लेते थे। 29-32॥
 
Ghritachi, Menaka, Rambha, Purvachitti, Swayamprabha, Urvashi, Mishrakeshi, Dandagauri, Varuthini, Gopali, Sahajanya, Kumbhayoni, Prajagara, Chitrasena, Chitralekha, Saha and Madhurswara – these and thousands of other nymphs started dancing at different places in Indra Sabha. Those lotus-loving nymphs were engaged in pleasing the minds of even accomplished men. Her waist and buttocks were huge. Her beautiful breasts were vibrating while dancing. His sarcasm, expressions and sweetness etc. used to hijack the mind, intellect and all the activities of the mind. 29-32॥
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि इन्द्रलोकाभिगमनपर्वणि इन्द्रसभादर्शने त्रिचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत इन्द्रलोकाभिगमनपर्वमें इन्द्रसभादर्शनविषयक तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)