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mahabharat 3.43.19: तत्पश्चात् पराक्रमी कुंतीपुत्र देवेन्द्र ने पास जाकर अपना सिर देवेन्द्र के चरणों में रख दिया, जिन्होंने अपनी गोल और मोटी भुजाओं से अर्जुन को उठाकर हृदय से लगा लिया।   |   mahabharat अध्याय 3.43: अर्जुनद्वारा देवराज इन्द्रका दर्शन तथा इन्द्रसभामें उनका स्वागत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 43: अर्जुनद्वारा देवराज इन्द्रका दर्शन तथा इन्द्रसभामें उनका स्वागत  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.43.19 
ततोऽभिगम्य कौन्तेय: शिरसाभ्यगमद् बली।
स चैनं वृत्तपीनाभ्यां बाहुभ्यां प्रत्यगृह्णत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी कुंतीपुत्र देवेन्द्र ने पास जाकर अपना सिर देवेन्द्र के चरणों में रख दिया, जिन्होंने अपनी गोल और मोटी भुजाओं से अर्जुन को उठाकर हृदय से लगा लिया।
 
Thereafter the powerful son of Kunti went near and placed his head at the feet of Devendra who lifted Arjun with his round and thick arms and embraced him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)