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mahabharat 3.43.10: तत्पश्चात देवता, गन्धर्व, सिद्ध और महर्षि अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्होंने बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले कुन्तीकुमार अर्जुन का स्वागत किया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.43: अर्जुनद्वारा देवराज इन्द्रका दर्शन तथा इन्द्रसभामें उनका स्वागत   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 43: अर्जुनद्वारा देवराज इन्द्रका दर्शन तथा इन्द्रसभामें उनका स्वागत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.43.10 
ततो देवा: सगन्धर्वा: सिद्धाश्च परमर्षय:।
हृष्टा: सम्पूजयामासु: पार्थमक्लिष्टकारिणम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात देवता, गन्धर्व, सिद्ध और महर्षि अत्यन्त प्रसन्न हुए और उन्होंने बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले कुन्तीकुमार अर्जुन का स्वागत किया॥10॥
 
Thereafter, the Gods, Gandharvas, Siddhas and Maharishis became very happy and welcomed Kuntikumar Arjun, who performed great deeds without any effort. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)