Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.42.36-37: सैकड़ों तपस्वी पुरुष, जिन्होंने तपस्या द्वारा स्वर्ग पर विजय प्राप्त की थी, झुंड में स्वर्ग जा रहे थे। हजारों गंधर्वों, गुह्यकों, ऋषियों और अप्सराओं को सूर्य के समान चमकते और अपने स्वयं प्रकाशित लोकों को देखकर अर्जुन आश्चर्यचकित हो गए। | mahabharat अध्याय 3.42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तपसा च जितं स्वर्गं सम्पेतु: शतसङ्घश:।
गन्धर्वाणां सहस्राणि सूर्यज्वलिततेजसाम्॥ ३६॥
गुह्यकानामृषीणां च तथैवाप्सरसां गणान्।
लोकानात्मप्रभान् पश्यन् फाल्गुनो विस्मयान्वित:॥ ३७॥
अनुवाद
सैकड़ों तपस्वी पुरुष, जिन्होंने तपस्या द्वारा स्वर्ग पर विजय प्राप्त की थी, झुंड में स्वर्ग जा रहे थे। हजारों गंधर्वों, गुह्यकों, ऋषियों और अप्सराओं को सूर्य के समान चमकते और अपने स्वयं प्रकाशित लोकों को देखकर अर्जुन आश्चर्यचकित हो गए।
Hundreds of ascetic men were going to heaven in droves, who had conquered it through austerity. Arjuna was amazed to see thousands of Gandharvas, Guhyakas, sages and Apsaras shining like the sun and their self-illuminated worlds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥