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mahabharat 3.42.32: वहाँ ऊपर जाकर उसने हजारों अद्भुत विमान देखे । वहाँ न तो सूर्य चमकता है, न चन्द्रमा । यहाँ तक कि अग्नि की चमक भी वहाँ कुछ काम नहीं आती ॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 3.42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.42.32 
ददर्शाद्‍भुतरूपाणि विमानानि सहस्रश:।
न तत्र सूर्य: सोमो वा द्योतते न च पावक:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ ऊपर जाकर उसने हजारों अद्भुत विमान देखे । वहाँ न तो सूर्य चमकता है, न चन्द्रमा । यहाँ तक कि अग्नि की चमक भी वहाँ कुछ काम नहीं आती ॥ 32॥
 
Going up there, he saw thousands of wonderful aircrafts. Neither the sun nor the moon shines there. Even the glow of fire is of no use there.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)