Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.42.30-31: परम बुद्धिमान कुरुनन्दन अर्जुन अत्यन्त प्रसन्न हुए और उस अद्भुत गति से चलने वाले सूर्यरूपी दिव्य रथ पर सवार होकर ऊपर की ओर बढ़ने लगे। धीरे-धीरे वे पुण्यात्माएँ मनुष्यों की दृष्टि से दूर हो गईं। 30-31॥   |   mahabharat अध्याय 3.42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  3.42.30-31 
स तेनादित्यरूपेण दिव्येनाद्‍भुतकर्मणा॥ ३०॥
ऊर्ध्वमाचक्रमे धीमान् प्रहृष्ट: कुरुनन्दन:।
सोऽदर्शनपथं यातो मर्त्यानां धर्मचारिणाम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
परम बुद्धिमान कुरुनन्दन अर्जुन अत्यन्त प्रसन्न हुए और उस अद्भुत गति से चलने वाले सूर्यरूपी दिव्य रथ पर सवार होकर ऊपर की ओर बढ़ने लगे। धीरे-धीरे वे पुण्यात्माएँ मनुष्यों की दृष्टि से दूर हो गईं। 30-31॥
 
The most intelligent Kurunandana Arjun became very happy and started moving upwards in that divine chariot in the form of the sun which moved with amazing speed. Gradually the virtuous souls moved away from the sight of humans. 30-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)