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mahabharat 3.42.22: 'गिरिराज! आप स्वर्ग की कामना रखने वाले ऋषियों, मुनियों और पुण्यात्माओं के लिए सदैव शुभ आश्रय बनें। 22॥   |   mahabharat अध्याय 3.42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 42: अर्जुनका हिमालयसे विदा होकर मातलिके साथ स्वर्गलोकको प्रस्थान  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.42.22 
साधूनां पुण्यशीलानां मुनीनां पुण्यकर्मणाम्।
त्वं सदा संश्रय: शैल स्वर्गमार्गाभिकाङ्क्षिणाम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'गिरिराज! आप स्वर्ग की कामना रखने वाले ऋषियों, मुनियों और पुण्यात्माओं के लिए सदैव शुभ आश्रय बनें। 22॥
 
'Giriraj! May you always be an auspicious shelter for sages, saints and virtuous people who aspire to heaven. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)