श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.41.9 
तथा लोकान्तकृच्छ्रीमान् यम: साक्षात् प्रतापवान्।
मर्त्यमूर्तिधरै: सार्धं पितृभिर्लोकभावनै:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसी प्रकार सम्पूर्ण जगत् के नाश करने वाले तेजस्वी एवं तेजस्वी यमराज वहाँ साक्षात् प्रकट हुए। उनके साथ मनुष्य रूप में जगत्-चेतन पितर भी थे॥9॥
 
In the same way, the glorious and glorious Yamraj, who is the destroyer of the whole world, appeared there in person. Along with him were the world-conscious ancestors in human form.॥9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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