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mahabharat 3.41.6: नागों, नदियों के देवताओं, दैत्यों और समुद्र के देवताओं के साथ जलचरों के स्वामी वरुणदेव ने भी अपने शुभ आगमन से उस स्थान को सुशोभित किया॥6॥   |   mahabharat अध्याय 3.41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.41.6 
नागैर्नदैर्नदीभिश्च दैत्यै: साध्यैश्च दैवतै:।
वरुणो यादसां भर्ता वशी तं देशमागमत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
नागों, नदियों के देवताओं, दैत्यों और समुद्र के देवताओं के साथ जलचरों के स्वामी वरुणदेव ने भी अपने शुभ आगमन से उस स्थान को सुशोभित किया॥6॥
 
Along with the serpents, the gods of the rivers, the demons and the deities of the sea, Varuna Deva, the lord of the aquatic animals, adorned the place with his auspicious arrival. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)