श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.41.47 
ततोऽर्जुनो महातेजा लोकपालान् समागतान्।
पूजयामास विधिवद् वाग्भिरद्भि: फलैरपि॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली अर्जुन ने वहाँ आये हुए जगत के रक्षकों की मधुर वाणी, जल और फलों से पूजा की।
 
Thereafter the mighty Arjuna worshipped the guardians of the world who had come there with sweet words, water and fruits.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)