vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना
»
श्लोक 46
श्लोक
3.41.46
तान् दृष्ट्वा लोकपालांस्तु समेतान् गिरिमूर्धनि।
जगाम विस्मयं धीमान् कुन्तीपुत्रो धनंजय:॥ ४६॥
अनुवाद
उस पर्वत शिखर पर एकत्रित हुए समस्त जगत् के रक्षकों को देखकर परम बुद्धिमान धनंजय को बड़ा आश्चर्य हुआ।
Seeing all those guardians of the world assembled on that mountain peak, the most intelligent Dhananjaya was astonished.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×