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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना
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श्लोक 45
श्लोक
3.41.45
रथो मातलिसंयुक्त आगन्ता त्वत्कृते महीम्।
तत्र तेऽहं प्रदास्यामि दिव्यान्यस्त्राणि कौरव॥ ४५॥
अनुवाद
'मातलिका द्वारा खींचा हुआ दिव्य रथ तुम्हें लेने के लिए पृथ्वी पर आ रहा है। हे कुरुपुत्र! मैं तुम्हें वहाँ (स्वर्ग में) दिव्यास्त्र दूँगा।'॥ 45॥
'The divine chariot drawn by Maatlika is coming to earth to take you. O son of Kuru, I will give you divine weapons there (in heaven).'॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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