vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना
»
श्लोक 43
श्लोक
3.41.43
कुन्तीमातर्महाबाहो त्वमीशान: पुरातन:।
परां सिद्धिमनुप्राप्त: साक्षाद् देवगतिं गत:॥ ४३॥
अनुवाद
महाबाहु कुन्तीकुमार! आप प्राचीन शासक हैं। आपने महान् सफलता प्राप्त की है। आपने साक्षात् दिव्य मार्ग प्राप्त किया है। 43॥
'Mighty-armed Kuntikumar! You are an ancient ruler. You have achieved great success. You have attained the divine path in person. 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×