श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.41.43 
कुन्तीमातर्महाबाहो त्वमीशान: पुरातन:।
परां सिद्धिमनुप्राप्त: साक्षाद् देवगतिं गत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु कुन्तीकुमार! आप प्राचीन शासक हैं। आपने महान् सफलता प्राप्त की है। आपने साक्षात् दिव्य मार्ग प्राप्त किया है। 43॥
 
'Mighty-armed Kuntikumar! You are an ancient ruler. You have achieved great success. You have attained the divine path in person. 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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