श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.41.40 
त्वदर्थमुद्यतं चेदं मया सत्यपराक्रम।
त्वमर्हो धारणे चास्य मेरुप्रतिमगौरव॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
हे मेरु के समान पुण्यवान और यशस्वी पार्थ! यह अस्त्र मैंने तुम्हारे लिए प्रस्तुत किया है। तुम इसे धारण करने योग्य हो।॥40॥
 
'Parth, who is virtuous and glorious like Meru! I have presented this weapon for you. You are worthy of wearing it.'॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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