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श्लोक 3.41.39  |
महात्मना शङ्करेण त्रिपुरं निहतं यदा।
तदैतदस्त्रं निर्मुक्तं येन दग्धा महासुरा:॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| ‘जब भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर की तीन नगरियों को नष्ट कर दिया था, तब उन्होंने इसी अस्त्र का प्रयोग किया था; जिसके प्रभाव से बड़े-बड़े राक्षस जलकर भस्म हो गए थे॥39॥ |
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| ‘When the Supreme Being Shankar destroyed the three cities of Tripurasur, this weapon was used by him; with the help of which many big demons were burnt to ashes.॥ 39॥ |
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