vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना
»
श्लोक 37
श्लोक
3.41.37
मत्तश्चैव भवानाशु गृह्णात्वस्त्रमनुत्तमम्।
अनेन त्वमनीकानि धार्तराष्ट्रस्य धक्ष्यसि॥ ३७॥
अनुवाद
'तुम्हें शीघ्र ही मुझसे यह उत्तम अस्त्र प्राप्त करना चाहिए। इससे तुम दुर्योधन की समस्त सेनाओं को भस्म कर दोगे।'
'You should quickly receive this excellent weapon from me. With this you will burn to ashes all the armies of Duryodhan.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×