Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.41.33-34: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! वरुण और यम द्वारा दिव्यास्त्र प्रदान करने के पश्चात् कैलाश के कोषाध्यक्ष कुबेर ने कहा - 'महाबली और बुद्धिमान पाण्डुपुत्र! मैं भी तुमसे प्रसन्न हूँ। तुम अपराजित योद्धा हो। मैं तुमसे मिलकर बहुत प्रसन्न हूँ।'॥ 33-34॥ | mahabharat अध्याय 3.41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! वरुण और यम द्वारा दिव्यास्त्र प्रदान करने के पश्चात् कैलाश के कोषाध्यक्ष कुबेर ने कहा - 'महाबली और बुद्धिमान पाण्डुपुत्र! मैं भी तुमसे प्रसन्न हूँ। तुम अपराजित योद्धा हो। मैं तुमसे मिलकर बहुत प्रसन्न हूँ।'॥ 33-34॥
Vaishampayana says - Janamejaya! After Varuna and Yama had given him the divine weapons, the treasurer of Kailash, Kubera said - 'Mahabali and intelligent son of Pandu! I am also pleased with you. You are an undefeated warrior. I am very pleased to meet you.'॥ 33-34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥