श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.41.32 
अनेन त्वं यदास्त्रेण संग्रामे विचरिष्यसि।
तदा नि:क्षत्रिया भूमिर्भविष्यति न संशय:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
"जब तुम इस अस्त्र को लेकर युद्धभूमि में विचरण करोगे, तब यह सम्पूर्ण पृथ्वी क्षत्रियों से रहित हो जाएगी, इसमें संशय नहीं है।" ॥32॥
 
"When you will roam the battlefield with this weapon, then this entire earth will be devoid of Kshatriyas, there is no doubt about it." ॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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