श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.41.30 
एभिस्तदा मया वीर संग्रामे तारकामये।
दैतेयानां सहस्राणि संयतानि महात्मनाम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'वीर! इन पाशों से मैंने भयंकर युद्ध में हजारों विशालकाय राक्षसों को बाँध दिया था।
 
'Valiant! With these nooses I had bound thousands of gigantic demons in the fierce battle.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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