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श्लोक 3.41.29  |
मया समुद्यतान् पाशान् वारुणाननिवारितान्।
प्रतिगृह्णीष्व कौन्तेय सरहस्यनिवर्तनम्॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| 'कुन्तीकुमार! मेरे द्वारा दिए गए इन वरुण पाशों को इनके रहस्य और निष्कर्ष सहित स्वीकार करो। इनके वेग को कोई नहीं रोक सकता॥ 29॥ |
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| 'Kuntikumar! Accept these Varuna nooses given by me along with their mystery and conclusion. No one can stop their speed.॥ 29॥ |
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