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mahabharat 3.41.29: 'कुन्तीकुमार! मेरे द्वारा दिए गए इन वरुण पाशों को इनके रहस्य और निष्कर्ष सहित स्वीकार करो। इनके वेग को कोई नहीं रोक सकता॥ 29॥   |   mahabharat अध्याय 3.41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.41.29 
मया समुद्यतान् पाशान् वारुणाननिवारितान्।
प्रतिगृह्णीष्व कौन्तेय सरहस्यनिवर्तनम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'कुन्तीकुमार! मेरे द्वारा दिए गए इन वरुण पाशों को इनके रहस्य और निष्कर्ष सहित स्वीकार करो। इनके वेग को कोई नहीं रोक सकता॥ 29॥
 
'Kuntikumar! Accept these Varuna nooses given by me along with their mystery and conclusion. No one can stop their speed.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)