श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.41.28 
पार्थ क्षत्रियमुख्यस्त्वं क्षत्रधर्मे व्यवस्थित:।
पश्य मां पृथुताम्राक्ष वरुणोऽस्मि जलेश्वर:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! तुम क्षत्रियों में प्रधान हो और क्षत्रिय धर्म में स्थित हो। हे विशाल और लाल नेत्रों वाले अर्जुन! मेरी ओर देखो। मैं जल का स्वामी वरुण हूँ।॥28॥
 
‘Parth! You are the chief among the Kshatriyas and are established in the Kshatriya Dharma. Huge and red-eyed Arjuna! Look at me. I am Varuna, the lord of water.॥ 28॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd