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mahabharat 3.41.25: महाबाहो! भगवान श्रीकृष्ण के साथ मिलकर तुम्हें इस पृथ्वी का भार हल्का करना है, अतः मेरे इस दण्डास्त्र को स्वीकार करो। इसका बल कभी बाधित नहीं होता। इस अस्त्र से तुम महान कार्य करोगे।॥25॥   |   mahabharat अध्याय 3.41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  3.41.25 
लघ्वी वसुमती चापि कर्तव्या विष्णुना सह।
गृहाणास्त्रं महाबाहो दण्डमप्रतिवारणम्।
अनेनास्त्रेण सुमहत् त्वं हि कर्म करिष्यसि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! भगवान श्रीकृष्ण के साथ मिलकर तुम्हें इस पृथ्वी का भार हल्का करना है, अतः मेरे इस दण्डास्त्र को स्वीकार करो। इसका बल कभी बाधित नहीं होता। इस अस्त्र से तुम महान कार्य करोगे।॥25॥
 
‘Mahabaho! Along with Lord Krishna, you have to lighten the burden of this earth, so accept this Dandaastra of mine. Its force is never obstructed. With this weapon, you will accomplish great things.’॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)