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mahabharat 3.41.22-23: हे शत्रुओं का नाश करने वाले कुन्तीपुत्र! पृथ्वी पर उत्पन्न हुए देवताओं, दानवों और राक्षसों के अंश, युद्ध में आपके द्वारा मारे जाने पर, अपने-अपने कर्मानुसार उचित गति को प्राप्त होंगे॥ 22-23॥   |   mahabharat अध्याय 3.41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 41: अर्जुनके पास दिक्पालोंका आगमन एवं उन्हें दिव्यास्त्र-प्रदान तथा इन्द्रका उन्हें स्वर्गमें चलनेका आदेश देना  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  3.41.22-23 
अंशाश्च क्षितिसम्प्राप्ता देवदानवरक्षसाम्॥ २२॥
त्वया निपातिता युद्धे स्वकर्मफलनिर्जिताम्।
गतिं प्राप्स्यन्ति कौन्तेय यथास्वमरिकर्षण॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले कुन्तीपुत्र! पृथ्वी पर उत्पन्न हुए देवताओं, दानवों और राक्षसों के अंश, युद्ध में आपके द्वारा मारे जाने पर, अपने-अपने कर्मानुसार उचित गति को प्राप्त होंगे॥ 22-23॥
 
'O son of Kunti, destroyer of enemies! The parts of the gods, demons and devils that were born on earth, after being killed by you in the war, will attain the appropriate destination according to their karma.॥ 22-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)