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mahabharat 3.40.24: तत्पश्चात् वह भयंकर अस्त्र अग्नि के समान प्रज्वलित मूर्तिरूपी होकर अनन्त पराक्रमी पाण्डुनंदन अर्जुन के पार्श्व में आ खड़ा हुआ। देवताओं और दानवों ने यह प्रत्यक्ष देखा॥24॥   |   mahabharat अध्याय 3.40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.40.24 
अथास्त्रं जाज्वलद् घोरं पाण्डवस्यामितौजस:।
मूर्तिमद् वै स्थितं पार्श्वे ददृशुर्देवदानवा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह भयंकर अस्त्र अग्नि के समान प्रज्वलित मूर्तिरूपी होकर अनन्त पराक्रमी पाण्डुनंदन अर्जुन के पार्श्व में आ खड़ा हुआ। देवताओं और दानवों ने यह प्रत्यक्ष देखा॥24॥
 
Thereafter, that dreadful weapon, in the form of an idol, blazing like fire, stood at the side of the infinitely mighty Pandu Nandan Arjuna. The gods and demons saw this directly. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)