Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.40.2: आपमें अथवा परम पुरुषोत्तम भगवान विष्णु में उत्तम तेज है। आप दोनों रत्नों ने अपने तेज से इस सम्पूर्ण जगत को आच्छादित कर रखा है। 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.40.2 
त्वयि वा परमं तेजो विष्णौ वा पुरुषोत्तमे।
युवाभ्यां पुरुषाग्रॺाभ्यां तेजसा धार्यते जगत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
आपमें अथवा परम पुरुषोत्तम भगवान विष्णु में उत्तम तेज है। आप दोनों रत्नों ने अपने तेज से इस सम्पूर्ण जगत को आच्छादित कर रखा है। 2॥
 
There is excellent brilliance in you or in the Supreme Lord Vishnu. Both of you precious gems have covered this entire world with your brilliance. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)