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mahabharat 3.40.16: देवराज इन्द्र, यम, यक्षराज कुबेर, वरुण या वायुदेवता भी इसे नहीं जानते, फिर सामान्य मनुष्य इसे कैसे जानेंगे?॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.40.16 
नैतद् वेद महेन्द्रोऽपि न यमो न च यक्षराट्।
वरुणोऽप्यथवा वायु: कुतो वेत्स्यन्ति मानवा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
देवराज इन्द्र, यम, यक्षराज कुबेर, वरुण या वायुदेवता भी इसे नहीं जानते, फिर सामान्य मनुष्य इसे कैसे जानेंगे?॥16॥
 
Even Devraj Indra, Yama, Yaksharaj Kuber, Varuna or Vayudevta do not know this. Then how will ordinary humans know it?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)