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mahabharat 3.40.13: उस अस्त्र को प्राप्त करके मैं भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य तथा सदैव कठोर वचन बोलने वाले सारथीपुत्र कर्ण से भी युद्ध कर सकूँगा॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.40.13 
युध्येयं येन भीष्मेण द्रोणेन च कृपेण च।
सूतपुत्रेण च रणे नित्यं कटुकभाषिणा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस अस्त्र को प्राप्त करके मैं भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य तथा सदैव कठोर वचन बोलने वाले सारथीपुत्र कर्ण से भी युद्ध कर सकूँगा॥13॥
 
Having obtained that weapon, I will be able to fight against Bhishma, Drona, Krupacharya and even with the son of a charioteer, Karna, who always spoke harsh words. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)