Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.40.11-12: मुझे वह अस्त्र प्रदान कीजिए जिससे मैं युद्ध में दैत्यों, राक्षसों, भूतों, प्रेतों, गन्धर्वों और सर्पों का नाश कर सकूँ। वह अस्त्र जिसके आवाहन करने पर हजारों भाले, भयंकर गदाएँ और विषैले सर्पों के समान बाण उत्पन्न हों। ॥11-12॥ | mahabharat अध्याय 3.40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुझे वह अस्त्र प्रदान कीजिए जिससे मैं युद्ध में दैत्यों, राक्षसों, भूतों, प्रेतों, गन्धर्वों और सर्पों का नाश कर सकूँ। वह अस्त्र जिसके आवाहन करने पर हजारों भाले, भयंकर गदाएँ और विषैले सर्पों के समान बाण उत्पन्न हों। ॥11-12॥
Provide me with the weapon with which I can destroy demons, monsters, ghosts, ghosts, Gandharvas and serpents in battle. The weapon which, when invoked, produces thousands of spears, terrifying maces and arrows resembling poisonous serpents. ॥11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥