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mahabharat 3.40.10: महादेव! मैं कर्ण, भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य आदि के साथ महान युद्ध करने जा रहा हूँ। उस युद्ध में मुझे एक दिव्यास्त्र चाहिए, जिससे मैं आपके आशीर्वाद से उन पर विजयी हो सकूँ।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.40.10 
कर्णभीष्मकृपद्रोणैर्भविता तु महाहव:।
त्वत्प्रसादान्महादेव जयेयं तान् यथा युधि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महादेव! मैं कर्ण, भीष्म, कृपाचार्य, द्रोणाचार्य आदि के साथ महान युद्ध करने जा रहा हूँ। उस युद्ध में मुझे एक दिव्यास्त्र चाहिए, जिससे मैं आपके आशीर्वाद से उन पर विजयी हो सकूँ।॥10॥
 
Mahadev! I am going to have a great war with Karna, Bhishma, Kripa, Dronacharya etc. In that war, I want a divine weapon so that I can be victorious over them with your blessings. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)