श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 40: भगवान् शंकरका अर्जुनको वरदान देकर अपने धामको प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.40.1 
देवदेव उवाच
नरस्त्वं पूर्वदेहे वै नारायणसहायवान्।
बदर्यां तप्तवानुग्रं तपो वर्षायुतान् बहून्॥ १॥
 
 
अनुवाद
देवदेव महादेवजी बोले - अर्जुन! तुम अपने पूर्व शरीर में 'नर' नामक प्रसिद्ध ऋषि थे। नारायण तुम्हारे मित्र हैं। तुमने बदरिकाश्रम में कई सहस्त्र वर्षों तक घोर तपस्या की है। 1॥
 
Devdev Mahadevji said – Arjun! You were a famous sage named ‘Nara’ in your previous body. Narayan is your friend. You have performed severe penance for many thousands of years in Badarika Ashram. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)