श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 4: विदुरजीका धृतराष्ट्रको हितकी सलाह देना और धृतराष्ट्रका रुष्ट होकर महलमें चला जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.4.6 
एतस्य ते दुष्प्रणीतस्य राजन्
शेषस्याहं परिपश्याम्युपायम्।
यथा पुत्रस्तव कौरव्य पापा-
न्मुक्तो लोके प्रतितिष्ठेत साधु॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुराज! मैं पाण्डवों पर अत्याचार करने वाले दुष्टात्माओं को प्रसन्न करने का उपाय जानता हूँ, जिससे आपका पुत्र दुर्योधन अपने पापों से मुक्त होकर संसार में सुयश प्राप्त करे।॥6॥
 
O King of Kurus! I know of a way to appease the evil spirits who have wronged the Pandavas so that your son Duryodhan is freed from his sins and achieve a good reputation in the world. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)