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mahabharat 3.4.5: शकुनि जैसे पापियों ने सभा में उस धर्म को धोखा दिया; क्योंकि आपके पुत्र ने सत्य की शपथ लेने वाले कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर को बुलाकर छलपूर्वक उसे हरा दिया है॥5॥   |   mahabharat अध्याय 3.4: विदुरजीका धृतराष्ट्रको हितकी सलाह देना और धृतराष्ट्रका रुष्ट होकर महलमें चला जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 4: विदुरजीका धृतराष्ट्रको हितकी सलाह देना और धृतराष्ट्रका रुष्ट होकर महलमें चला जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.4.5 
स वै धर्मो विप्रलब्ध: सभायां
पापात्मभि: सौबलेयप्रधानै:।
आहूय कुन्तीसुतमक्षवत्यां
पराजैषीत् सत्यसंधं सुतस्ते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
शकुनि जैसे पापियों ने सभा में उस धर्म को धोखा दिया; क्योंकि आपके पुत्र ने सत्य की शपथ लेने वाले कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर को बुलाकर छलपूर्वक उसे हरा दिया है॥5॥
 
Sinners like Shakuni betrayed that religion in the meeting; Because your son has called Kuntinandan Yudhishthira, who has sworn in truth, and has defeated him deceitfully. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)