Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.4.22: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! ऐसा कहकर राजा धृतराष्ट्र सहसा उठकर महल के भीतर चले गए। फिर विदुर वहाँ गए जहाँ पांडव थे, और कहा कि अब इस कुल का विनाश अवश्यंभावी है। | mahabharat अध्याय 3.4: विदुरजीका धृतराष्ट्रको हितकी सलाह देना और धृतराष्ट्रका रुष्ट होकर महलमें चला जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! ऐसा कहकर राजा धृतराष्ट्र सहसा उठकर महल के भीतर चले गए। फिर विदुर वहाँ गए जहाँ पांडव थे, और कहा कि अब इस कुल का विनाश अवश्यंभावी है।
Vaishampayana says - Janamejaya! Saying this, King Dhritarashtra suddenly got up and went inside the palace. Then Vidur went to the place where the Pandavas were, saying that now the destruction of this clan is inevitable.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि अरण्यपर्वणि विदुरवाक्यप्रत्याख्याने चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत अरण्यपर्वमें विदुरवाक्यप्रत्याख्यानविषयक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥