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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 4: विदुरजीका धृतराष्ट्रको हितकी सलाह देना और धृतराष्ट्रका रुष्ट होकर महलमें चला जाना
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श्लोक 17
श्लोक
3.4.17
त्वया पृष्ट: किमहमन्यद् वदेय-
मेतत् कृत्वा कृतकृत्योऽसि राजन्॥ १७॥
अनुवाद
हे कुरुराज! आपने प्रजा का कल्याण पूछा है, अतः मैं आपसे और क्या कहूँ? यह सब करके आप बहुत कृतार्थ होंगे॥17॥
O King of Kurus! You have asked about the welfare of the people, so what else can I tell you. After doing all this, you will be very grateful. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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