Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.4.13: यदि आपका पुत्र दुर्योधन पाण्डवों के साथ राज्य करने के लिए प्रसन्नतापूर्वक सहमत हो जाए, तो आपको इसका खेद नहीं होगा, आपको सुख ही सुख होगा। यदि दुर्योधन आपकी बात से सहमत न हो, तो आपको अपने पुत्र को नियंत्रित करके सम्पूर्ण कुल को सुख पहुँचाना चाहिए॥13॥ | mahabharat अध्याय 3.4: विदुरजीका धृतराष्ट्रको हितकी सलाह देना और धृतराष्ट्रका रुष्ट होकर महलमें चला जाना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्येतदेवमनुमन्ता सुतस्ते
सम्प्रीयमाण: पाण्डवैरेकराज्यम्।
तापो न ते भविता प्रीतियोगा-
न्न चेन्निगृह्णीष्व सुतं सुखाय॥ १३॥
अनुवाद
यदि आपका पुत्र दुर्योधन पाण्डवों के साथ राज्य करने के लिए प्रसन्नतापूर्वक सहमत हो जाए, तो आपको इसका खेद नहीं होगा, आपको सुख ही सुख होगा। यदि दुर्योधन आपकी बात से सहमत न हो, तो आपको अपने पुत्र को नियंत्रित करके सम्पूर्ण कुल को सुख पहुँचाना चाहिए॥13॥
If your son Duryodhan happily agrees to form a kingdom with the Pandavas, you will not regret it, you will only be happy. If Duryodhan does not agree to your proposal, you should control your son to bring happiness to the entire clan.॥13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥