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mahabharat 3.4.10-11: क्रोध में भरे हुए भीमसेन या अर्जुन अपने शत्रुओं की सेना में किसी को भी जीवित नहीं छोड़ेंगे। जिनके योद्धा सव्यसाची अर्जुन हैं, जो अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण हैं, जिनका धनुष गाण्डीव है, जो सम्पूर्ण जगत का सार है और जिनके लिए अपने बाहुबल से सुशोभित भीमसेन युद्ध करने जा रहे हैं, उन पाण्डवों के लिए संसार में ऐसी कौन सी वस्तु है जो प्राप्त न हो? तुम्हारे पुत्र दुर्योधन के जन्म लेते ही, उस समय जो कुछ भी हितकर समझ में आया था, वह मैंने तुम्हें पहले ही बता दिया था॥10-11॥   |   mahabharat अध्याय 3.4: विदुरजीका धृतराष्ट्रको हितकी सलाह देना और धृतराष्ट्रका रुष्ट होकर महलमें चला जाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 4: विदुरजीका धृतराष्ट्रको हितकी सलाह देना और धृतराष्ट्रका रुष्ट होकर महलमें चला जाना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  3.4.10-11 
न हि क्रुद्धो भीमसेनोऽर्जुनो वा
शेषं कुर्याच्छात्रवाणामनीके।
येषां योद्धा सव्यसाची कृतास्त्रो
धनुर्येषां गाण्डिवं लोकसारम्॥ १०॥
येषां भीमो बाहुशाली च योद्धा
तेषां लोके किं नु न प्राप्यमस्ति।
उक्तं पूर्वं जातमात्रे सुते ते
मया यत् ते हितमासीत् तदानीम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
क्रोध में भरे हुए भीमसेन या अर्जुन अपने शत्रुओं की सेना में किसी को भी जीवित नहीं छोड़ेंगे। जिनके योद्धा सव्यसाची अर्जुन हैं, जो अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण हैं, जिनका धनुष गाण्डीव है, जो सम्पूर्ण जगत का सार है और जिनके लिए अपने बाहुबल से सुशोभित भीमसेन युद्ध करने जा रहे हैं, उन पाण्डवों के लिए संसार में ऐसी कौन सी वस्तु है जो प्राप्त न हो? तुम्हारे पुत्र दुर्योधन के जन्म लेते ही, उस समय जो कुछ भी हितकर समझ में आया था, वह मैंने तुम्हें पहले ही बता दिया था॥10-11॥
 
Bhimasena or Arjuna, filled with anger, will not leave anyone alive in the army of their enemies. For the Pandavas, whose warriors are Savyasachi Arjuna, who is adept in the art of weapons, whose bow is Gandiva, which is the essence of the whole world, and for whom Bhimasena, adorned with his arm strength, is going to fight, what is there in the world that cannot be obtained? As soon as your son Duryodhan was born, I had already told you whatever I thought would be beneficial at that time.॥10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)