Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.39.82: महादेव! मैंने बड़े साहस के साथ आपके साथ यह युद्ध किया है, इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। मुझसे यह अनजाने में हुआ है। शंकर! अब मैं आपकी शरण में आया हूँ। कृपया मेरी धृष्टता क्षमा करें। | mahabharat अध्याय 3.39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न मे स्यादपराधोऽयं महादेवातिसाहसात्।
कृतो मयायमज्ञानाद् विमर्दो यस्त्वया सह।
शरणं प्रतिपन्नाय तत् क्षमस्वाद्य शंकर॥ ८२॥
अनुवाद
महादेव! मैंने बड़े साहस के साथ आपके साथ यह युद्ध किया है, इसमें मेरा कोई दोष नहीं है। मुझसे यह अनजाने में हुआ है। शंकर! अब मैं आपकी शरण में आया हूँ। कृपया मेरी धृष्टता क्षमा करें।
Mahadev! I have fought this battle with you with great courage, I am not at fault in this. I have done this unknowingly. Shankar! I have now come to your refuge. Please forgive my impudence.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥