vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति
»
श्लोक 80
श्लोक
3.39.80
व्यतिक्रमं मे भगवन् क्षन्तुमर्हसि शंकर।
भगवन् दर्शनाकाङ्क्षी प्राप्तोऽस्मीमं महागिरिम्॥ ८०॥
अनुवाद
हे दयालु प्रभु! मेरा अपराध क्षमा करें। प्रभु! मैं आपके दर्शन की इच्छा से इस महान पर्वत पर आया हूँ। 80॥
Benevolent God! Forgive my crime. Lord! I have come to this great mountain with the desire to see you. 80॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×