श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  3.39.78 
पिनाकगोप्त्रे सूर्याय मंगल्याय च वेधसे।
प्रसादये त्वां भगवन् सर्वभूतमहेश्वर॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
हे पिनाक के रक्षक, सूर्यस्वरूप, शुभ और सृष्टिकर्ता, आपको नमस्कार है। हे प्रभु! सर्वशक्तिमान महेश्वर! मैं आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ। 78॥
 
Salutations to you, the protector of Pinaka, the form of the sun, the auspicious and the creator. Lord! Omnipotent-Maheshwar! I want to please you. 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)