श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  3.39.77 
दक्षयज्ञविनाशाय हरिरुद्राय वै नम:।
ललाटाक्षाय शर्वाय मीढुषे शूलपाणये॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान हरिहर, आपको नमस्कार है, जिन्होंने दक्ष यज्ञ का विध्वंस किया। आपके मस्तक पर तीसरा नेत्र सुशोभित है। आप संसार के संहारक होने के कारण शर्व कहलाते हैं। भक्तों की मनोवांछित कामनाओं की पूर्ति करने के कारण आपका नाम मीध्वान (वर्षाशील) है। हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले आपको नमस्कार है। 77.
 
Salutations to you Lord Harihar who destroyed the Daksha Yagna. The third eye graces your forehead. You are called Sharva because you are the destroyer of the world. Your name is Meedhvan (Varshansheel) because you shower the desired desires of the devotees. Salutations to you who holds the trident in your hand. 77.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)