Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.39.75: हे प्रभु! मैं आपको समस्त कारणों में सर्वश्रेष्ठ कारण मानता हूँ। आपके तीन नेत्र हैं और आप सर्वव्यापी हैं। आप समस्त देवताओं के आश्रय हैं। हे प्रभु! यह सम्पूर्ण जगत् आपसे ही उत्पन्न हुआ है ॥ 75॥ | mahabharat अध्याय 3.39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कारणानां च परमं जाने त्वां त्र्यम्बकं विभुम्।
देवानां च गतिं देव त्वत्प्रसूतमिदं जगत्॥ ७५॥
अनुवाद
हे प्रभु! मैं आपको समस्त कारणों में सर्वश्रेष्ठ कारण मानता हूँ। आपके तीन नेत्र हैं और आप सर्वव्यापी हैं। आप समस्त देवताओं के आश्रय हैं। हे प्रभु! यह सम्पूर्ण जगत् आपसे ही उत्पन्न हुआ है ॥ 75॥
Lord! I consider you to be the best cause of all causes. You have three eyes and are omnipresent. You are the refuge of all the gods. O Lord! This entire universe has originated from you. ॥ 75॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥