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श्लोक  3.39.72 
वैशम्पायन उवाच
ततो देवं महादेवं गिरिशं शूलपाणिनम्।
ददर्श फाल्गुनस्तत्र सह देव्या महाद्युतिम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! इसके बाद अर्जुन ने देवी पार्वती के साथ शूलपाणि महादेवजी को बड़े ऐश्वर्य के साथ देखा। 72॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter Arjun saw Shulpani Mahadevji with great splendor along with Goddess Parvati. 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)