श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  3.39.70 
ददामि ते विशालाक्ष चक्षु: पूर्वऋषिर्भवान्।
विजेष्यसि रणे शत्रूनपि सर्वान् दिवौकस:॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
विशाललोचन! मैं तुम्हें दिव्य दृष्टि प्रदान करता हूँ। तुम 'नर' नामक प्रथम ऋषि हो। तुम युद्ध में अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करोगे, चाहे वे सभी देवता ही क्यों न हों। 70.
 
Vishallochan! I give you divine sight. You are the first sage named 'Nara'. You will be victorious in battle over your enemies, even if they are all gods. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)