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mahabharat 3.39.64: दो घंटे तक उसी स्थिति में पड़े रहने के बाद जब अर्जुन को होश आया तो वह उठ खड़ा हुआ। उस समय उसका सारा शरीर रक्त से लथपथ था और वह बहुत दुःखी हो गया। 64.   |   mahabharat अध्याय 3.39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.39.64 
स मुहूर्तं तथा भूत्वा सचेता: पुनरुत्थित:।
रुधिरेणाप्लुताङ्गस्तु पाण्डवो भृशदु:खित:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
दो घंटे तक उसी स्थिति में पड़े रहने के बाद जब अर्जुन को होश आया तो वह उठ खड़ा हुआ। उस समय उसका सारा शरीर रक्त से लथपथ था और वह बहुत दुःखी हो गया। 64.
 
After lying in the same position for two hours, when Arjuna regained consciousness, he stood up. At that time his whole body was soaked in blood and he became very sad. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)