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mahabharat 3.39.63: महात्मा भगवान शंकर के द्वारा भलीभाँति वश में हो जाने के कारण अर्जुन की श्वास रुक गई और वे प्राणहीन होकर पृथ्वी पर गिर पड़े ॥63॥   |   mahabharat अध्याय 3.39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.39.63 
निरुच्छ्वासोऽभवच्चैव संनिरुद्धो महात्मना।
पपात भूम्यां निश्चेष्टो गतसत्त्व इवाभवत्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
महात्मा भगवान शंकर के द्वारा भलीभाँति वश में हो जाने के कारण अर्जुन की श्वास रुक गई और वे प्राणहीन होकर पृथ्वी पर गिर पड़े ॥63॥
 
Due to being well controlled by Mahatma Lord Shankar, Arjun's breathing stopped. Like a lifeless being, they fell on the earth, feeling motionless. 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)