श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.39.6 
क्षणेन तद् वनं सर्वं नि:शब्दमभवत् तदा।
नाद: प्रस्रवणानां च पक्षिणां चाप्युपारमत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
एक ही पल में पूरा जंगल शांत हो गया। झरनों और पक्षियों की आवाज़ भी बंद हो गई।
 
In a single moment the whole forest became silent. Even the sound of waterfalls and birds stopped.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)