श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 39: भगवान् शंकर और अर्जुनका युद्ध, अर्जुनपर उनका प्रसन्न होना एवं अर्जुनके द्वारा भगवान् शंकरकी स्तुति  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  3.39.59 
जघानाथ ततो जिष्णु: किरातमुरसा बली।
पाण्डवं च विचेष्टं तं किरातोऽप्यहनद् बली॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली अर्जुन ने अपनी छाती से किरात पर बड़े जोर से प्रहार किया, फिर महाबली किरात ने भी विपरीत चेष्टा करने वाले पाण्डुनन्दन अर्जुन पर आक्रमण किया ॥59॥
 
After that, the mighty brave Arjuna hit Kirat with great force with his chest, then the mighty Kirat also attacked Pandunandan Arjun who tried to do the opposite. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)